चेहराकलां:संत एम इंग्लिश पब्लिक स्कूल में बच्चों नें धूमधाम से मनाया गया बिहार दिवस।

चेहराकलां, सत्यम ग्राम न्यूज़ : संत एम इंग्लिश पब्लिक स्कूल में बच्चों नें  धूमधाम से बिहार दिवस मनाया गया । कार्यक्रम में उपस्थित विद्यालय के निदेशक एम के सुमन ने बच्चों को बताया कि यह बिहार है चंद्रगुप्त का अहंकार है अशोक का मस्तक के शाख है IAS और IPS इंजीनियर और डॉक्टर जन्मे लाखों लाख है सीता की सीतामढ़ी बुद्ध को यही बुद्धि मिली गुरु गोविंद सिंह का खालसा महावीर जैसे सारे लाल हैं मधुबनी की पेंटिंग मुजफ्फरपुर कि लिचि भागलपुरी सिल्क साड़ी यहां हाथों के अनगिनत कलाकरियाँ” है।

लिट्टी चोखा का स्वाद है माझी सा प्रेम रोग यही है। दिनकर ,बेनीपुरी ,विद्यापति, भिखारी ठाकुर, बिस्मिल्लाह खान जैसे लोग यही है। गमछे पर अभिमान है नालंदा विश्वविद्यालय वाला ज्ञान है। कैमूर, रोहतास ,वैशाली देखो स्वर्ग दिखेगा ।आर्यभट्ट का शून्य मिलेगा ।भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पर अभिमान है और यह तो छठी मैया वाली बिहार है शारदा सिन्हा के गीत पे जान न्योछावर है ठेकुआ का पहला प्यार है हमारा सुनहरा इतिहास है आने वाला कल उससे भी खास है।

बिहार को राज्य का दर्जा 22 मार्च 1912 में मिला जब यह बंगाल से अलग होकर एक स्वतंत्र प्रांत बना. जब बिहार राज्य बना, तब इसकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित थी शिक्षा और औद्योगिक विकास की ओर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता था और आज इसमें बहुत ज्यादा सुधार हुआ है

बिहार का इतिहास प्राचीन काल से ही गौरवशाली रहा है। यह मगध और मौर्य जैसे शक्तिशाली साम्राज्यों की राजधानी थी, जिसने इस क्षेत्र के ऐतिहासिक पथ को आकार दिया। प्रसिद्ध नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय यहाँ फले-फूले, जिन्होंने दुनिया भर के विद्वानों को अपनी ओर आकर्षित किया। बिहार की रणनीतिक स्थिति ने व्यापार मार्गों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुगम बनाया साथ ही इसकी समृद्धि में भी योगदान दिया। इसे सदियों तक आक्रमणों और विदेशी शासन का सामना करना पड़ा। आधुनिक समय में, बिहार ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करना जारी रखा। इसका समृद्ध इतिहास भारतीय उपमहाद्वीप में इसके स्थायी महत्व का प्रमाण है।

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AKHILESH KUMAR
Author: AKHILESH KUMAR

Editor in Chief