
किसानो को तरबूजा,ककड़ी,खीरा लालमी खेती से लाखों की हो रही कमाई।
बिहार : पटना /हाजीपुर /सोनपुर : गंगा व नरायणी नदी क़े रेत पर तरबूजा,ककड़ी, लालमी, खीरा क़े खेती होने से हर जगह हरियाली छाई हुई है। प्रत्येक वर्ष गंगा और गंडक नदी में बाढ़ आने से लाखों रूपये क़े फसलों की बर्बादी के कारण किसानो को कमर टूट जाती है लेकिन ईश्वर क़े महिमा की उसी नदी किनारे के खेतों में रेत भर जाती है। इसी रेतीली जमीन में दियारा के लगभग 5 हजार से अधिक किसानों को रोजगार मिल जाती है जिसमे सैकड़ो किसान बालू पर जीतोड़ मेंहनत कर परवल व तरबूज के साथ ही ककड़ी और खीरा, लालमी की फसल रेतील जमीन पर उगा कर उस भूमि पर हरियाली लहलहा रही है।उ
गौड़तालब हो की उस भूमि से सैकड़ो किसान अच्छी फसल उत्पादन कर लाखों रूपये कमा कर अपनी हुई फसले क़े वर्वादी को कुछ अंश निकाल लेते है। इस बार पिछले साल बेमौसम बरसात के बाद नदी में पानी बढ़ जाने से बर्बाद हुई फसलों से हुए नुकसान की भरपाई इस बार होने की उम्मीद है । किसानो ने बताया कि मार्च और अप्रैल महीने की गर्मी से जब चहुंओर हरियाली मिटने लगती है और जब धरती तपने लगती है तो इसकी रेत पर फसले लगाकर हरियाली फैल जाता है।
किसानो ने बताया कि गंगा व गंडक का गर्भ में खीरा, ककड़ी, लौकी, करेला, तरबूज व खरबूजा, परवल से भूमि लहलहा रहा है। किसानो ने बताया कि इस बार का फसल अच्छी है हलांकि अभी कुछ ही किसानों के खेतों में फसल निकल रही है। पौ फटते ही व्यापारियों की गाड़ियां दियारे में पहुंच जाती है। गंगा व गंडक का किनारा सुबह के समय बड़ी मंडी में तब्दिल हो जाता है।
फसल क़े घाट किनारे लोकल विक्रेताओं से लेकर पटना शहर के व्यापारियों का तांता लगा रहता है। किसानों ने बताया कि लगभग छह माह की इस खेती से पूरे साल का खर्च भी निकल जाता है। खरबुजे पर प्रति बीघा 70 से 80 हजार और तरबूजे की खेती से प्रति बीघा 3 से साढ़े तीन लाख की कमाई होती है।किसानों ने बताया कि तरबूजा 1200–1500 रूपये, लालमी 8 से 1200 रूपये,खीरा 800-1000 रूपये, ककड़ी 500-800 सैकड़ा क़े बिक्री हो रही है। किसानो ने कहा कि खेती करना काफी मेहनत भरा है। पौधों को सिंचना काफी श्रम भरा है। नदी के बीच बालू पर खेती करना जुआ खेलने के बराबर है।
लह गया तो मालामाल हो गए और दहार आ गई तो एक ही रात में कंगाल बना देती है। नारायणी मईया की कृपा हो गयी तो तीन माह की इस खेती में हम गरीबों का एक वर्ष की दाल रोटी का इंतजाम हो जाता है।
ये भी पढ़े…
राजापाकर : के सी आई के बच्चों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति से दर्शकों के मन को मोहा।
Author: SANJEET KUMAR
संवाददाता,सोनपुर