सत्यम ग्राम न्यूज़, गोरौल / वैशाली । किसी भी गांव – घर, नगर – शहर या राज्य की सड़कों को देखकर उसके विकसित होने या पिछड़े होने का अंदाजा लगाया जा सकता है। सड़क का निर्माण यात्रा को सुगम और सरल बनाने के उद्देश्य से सरकार के द्वारा करवाई जाती है । आम लोगों के सहूलियत को देखकर ग्रामीण सड़कों को प्रखंड, अंचल, थाना, हॉस्पिटल, रेलवे स्टेशन, बस अड्डा,स्कूलों वगैरह से जोड़ा जाता है।

सड़के से प्रतिदिन सरकारी कर्मचारी, शिक्षकों, विद्यार्थियों, व्यापारियों, कामकाजी लोगों को अपने-अपने गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाने का काम करती है। लेकिन अगर इसी सड़क की वजह से आए दिन दुर्घटना घटने लगे, जाम लगने लगे, लोग भुत परेशान रहने लगे, सड़क पर साइकिल चलाना, पैदल चलना जानलेवा हो जाए तो सड़क लोगों के लिए आवागमन का साधन नहीं होकर श्मशान घाट और अस्पताल जाने का माध्यम बन जाता है।
हम चर्चा कर रहे हैं गोरौल चौक से गोरौल स्टेशन, कर्पूरी चौक , सोंधो गोला, रामदासपुर होते हुए महुआ मुजफ्फरपुर मुख्य सड़क में मिलने वाली व्यस्तम सड़क का। प्रखंड मुख्यालय गोरौल, थाना, अंचल कार्यालय, कृषि कार्यालय, न एच जहां से पटना ,दरभंगा, बेतिया, मुजफ्फरपुर ,सीतामढ़ी,जमशेदपुर, राँची ,सिल्लीगुड़ी सहित अन्य राज्यों के लिए भी लोग बस पकड़ते हैं । यह सड़क दशको पुराना है। जो स्वरूप इसका 30- 40 वर्ष पहले था कमोवेश वही स्वरूप आज भी है। काफी व्यस्त सड़क होने के बावजूद आज तक इसका चौड़ीकरण नहीं किया गया।
चौड़ाई नहीं बढ़ाए जाने के कारण इस पर चलने वाली ट्रैकों और बड़ी वाहनों की चपेट में आकर अभी तक दर्जनों लोग अपनी जान गवा चुके हैं। जब गोरौल चौक से गोरौल स्टेशन की ओर इस सड़क के साथ बढ़ते हैं तो प्रखंड मुख्यालय के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोरौल, ग्रामीण बैंक,नगर पंचायत कार्यालय,गंडक परियोजना कार्यालय के साथ एक प्राइवेट विद्यालय पड़ता है। गोरौल स्टेशन और गोरौल चौक के बीच ही दर्जनों बड़े-बड़े गोदाम भी बने हैं जहां बड़े-बड़े ट्रैकों का आवाजाही हमेशा बना रहता है ।वहीं उच्च विद्यालय गोरौल, मध्य विद्यालय गोरौल चकव्यास भी है।
इन दोनों विद्यालयों में करीब 3000 से ऊपर बच्चे प्रतिदिन पढ़ने आते हैं। अभी तक कई बच्चे ट्रक और बड़ी गाड़ियों की चपेट में आकर घायल हो चुके हैं। इसी रास्ते से अधिकांश शिक्षक प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों में जाते हैं तो सैकड़ो लोग प्रतिदिन गोरौल स्टेशन जाकर रेलगाड़ी पकड़ते हैं ।सड़क की चौड़ाई कम होने की वजह से दर्जनों शिक्षक अपना हाथ पैर तुड़वा चुके हैं ।रेलवे स्टेशन के बाद इसी सड़क के किनारे कन्या मध्य विद्यालय गोरौल भी है तो पंजाब नेशनल बैंक गोरौल, स्टेट बैंक गोरौल, चीनी मिल का औद्योगिक क्षेत्र भी है ।
कर्पूरी चौक के पास में दो बड़े-बड़े प्राइवेट विद्यालय भी है तो आगे बढ़ने पर प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मलंग स्थान मंदिर, मध्य विद्यालय चांदपुरा ,उच्च विद्यालय सोन्धो, उप स्वास्थ्य केंद्र सोंधो,मध्य विद्यालय रामदासपुर है ।इन विद्यालयों में हजारों बच्चे प्रतिदिन पढ़ने जाते हैं ।सड़क की चौड़ाई कम होने और लापरवाह ट्रक, बस, ऑटो, टोटो चालकों के कारण आए दिन दुर्घटना घटी रहती है। लेकिन सरकार की नजर इस सड़क पर आज तक नहीं पड़ी है ।
हमेशा दुर्घटना घटित होते रहने के कारण बच्चों के साथ-साथ बड़े भी डरे सहमे ,अपनी जान जोखिम में डाल कर इस सड़क पर चलते को मजबूर हैं। बरसात के दिनों में और कठिनाई बढ़ जाती है। सड़क के दोनों और पानी जमा हो जाने के कारण बड़ी गाड़ियों के कारण जाम का सामना करना पड़ता है। कई बार आम लोग, विद्यार्थियों ,शिक्षकों,चिकित्सकों ,बैंककर्मियों के साथ-साथ रोगियों की गाड़ियां भी जाम में फंस जाती है ।
वहीं बड़ी गाड़ियों के पीछे ऑटो,टोटो, बाइक, साइकिल एवं छोटी सवारी की लंबी कतार लग जाती है ।आए दिन होने वाले दुर्घटनाओं में घायल लोगों, विद्यार्थियों की परेशानी से बेखबर पथ निर्माण विभाग की नींद तो अब तक इस सड़क पर दुर्घटना से हो रही मौतों से भी नहीं खुली ।स्थानीय सांसद दूसरी बार निर्वाचित हुई है जबकि विधायक का प्रयास भी अभी तक निष्फल ही साबित हुआ है। इस सड़क का भाग्य कब बदलेगा ।कब शिक्षक, छात्र ,कामगार, कर्माचारी और आम लोग निश्चिंत्यता के साथ इस सड़क पर यात्रा कर पाएंगे इसका पता नहीं है। लेकिन इस सड़क का जब तक चौड़ीकरण नहीं होगा तब तक यह सड़क जानलेवा सड़क के रूप में लोगों को डराती रहेगी|
ये भी पढ़े…
राजापाकर : शिक्षक दिवस के रूप में धूमधाम से मनाया गया डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती|
राजापाकर : शिक्षक दिवस के रूप में धूमधाम से मनाया गया डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती|
रिपोर्ट : प्रकाश वर्मा, सत्यम ग्राम न्यूज़ नेटवर्क