शीर्षक : राही तु मतवाले हैं।

लेखक : रमेश प्रसाद सिंह ”पत्रकार ‘

लेखक रमेश प्रसाद सिंह “पत्रकार ”

राही तु मतवाले हैं,गजब खेल निराले हैं।

बचपन में निश्छल भावों वाले है,कदम तेरी निराले हैं।

राही तू मतवाले हैं,गजब खेल निराले हैं।

नयनों के सुखसागर पली भाव जगाने वाले है,चली बसंती की राही मासूम के स्वर निराले हैं।

भावों के स्वर में निश्छल भाव जगाने वाले हैं,शयन सांवरिया दिल के खेल निराले हैं।

राही तु मतवाले हैं,गजब खेल निराले हैं।राही मासूम तेरी यादों में मतवाले हैं,पथिक की राही के खेल निराले हैं।

राह बनी संस्कारों से खेल बड़ी निराले हैं,जग तारन तरन से गजब खेल निराले हैं।

तन झुकी मन झुकी नजरें टिकी मतवाले हैं,नयनों के स्वर में निश्छल भाव जगाने वाले है।राही तु मतवाले हैं,गजब खेल निराले हैं।

AKHILESH KUMAR
Author: AKHILESH KUMAR

Editor in Chief