राजापाकर, सत्यम ग्राम न्यूज़ प्रकाश वर्मा। संत रविदास जयंती के अवसर पर बीएमडी महाविद्यालय दयालपुर के परिसर में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए क्रांतिवीर कवि एवं हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर महर्षि अखिलेश ने कहा कि भारतीय परंपरा के आलोक पुरुष संत रविदास ने अखिल जर जंगम में परम ब्रह्म राम के दर्शन किए।
कर्म योग, ज्ञान योग एवं भक्ति योग की त्रिवेणी को मन मानस में अधिष्ठित किया।वे तीर्थराज प्रयाग की तरह थे। संत रविदास के लोकमंगल और आनंद का अमृत निर्झर उनके साहित्य में विद्यमान है। प्रभु जी तुम चंदन हम पानी जैसे अमर पंक्ति के रचयिता संत रविदास ने ही महान भक्त कवित्री मीरा को राम रतन धन प्रदान किया था। वे कालजयी रचनाकार थे और अखिल सृष्टि को अध्यात्म की खुशबू से लवलेश करने वाले महान मनीषी थे।
हिंदी के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉक्टर सुभाष कुमार ने कहा कि संत रविदास ने अपने काव्य में पर्यावरण के साथ-साथ सह आस्तित्व की बात की है। जब रविदास कहते हैं तुम धन- वन हम मोरा हम जान रहे हैं कि आज पर्यावरण संरक्षण की अति आवश्यकता है। आज से सदियों पूर्व महान संत रविदास की दृष्टि और मनीषा इस बिंदु पर केंद्रित हुई । यह शलाध्य और अविस्मरणीय है।मंच का बखूबी संचालन प्रोफेसर कुमार संजीव रंजन ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग की विदुषी प्राध्यापिका डॉक्टर पूजा कुमारी ने किया।
Author: AKASH CHANDRA VERMA
ब्यूरो चीफ, वैशाली