सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वैशाली में शिक्षकों की नियुक्ति की जांच तेज, अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा समाप्ति और बर्खास्त शिक्षकों की पुनर्बहाली के निर्देश

12 अक्टूबर तक तीन प्रपत्रों में मांगी गई रिपोर्ट, सूचना छिपाने पर अवमानना और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी

हाजीपुर/वैशाली। सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में वैशाली जिले में अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों की नियुक्ति और सेवा से जुड़े मामलों की जांच तेज कर दी गई है। जिला शिक्षा पदाधिकारी रवींद्र कुमार ने पत्रांक 2431, दिनांक 7 अक्टूबर 2026 के माध्यम से जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) को तीन निर्धारित प्रपत्रों में रिपोर्ट तैयार कर 12 अक्टूबर 2026 तक जिला कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

यह निर्देश प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पत्रांक 2853, दिनांक 1 अक्टूबर 2026 के आलोक में जारी किया गया है। इसमें 31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों की प्रशिक्षण संबंधी अर्हता, इसके बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा तथा पूर्व में बर्खास्त किए गए शिक्षकों की पुनर्बहाली से संबंधित मामलों का विवरण मांगा गया है।

31 मार्च 2015 तक नियुक्त शिक्षकों को 2028 तक का समय

पत्र के अनुसार, 31 मार्च 2015 तक या उससे पहले नियुक्त सभी अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक डीएलएड (D.El.Ed.) की निर्धारित अर्हता प्राप्त करनी होगी। पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समयसीमा के बाद अर्हता पूरी करने के लिए समय-विस्तार की मांग करने वाला कोई आवेदन या याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी।

2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा समाप्त करने का निर्देश

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने निर्देश दिया है कि 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों की नियुक्ति को अवैध मानते हुए संबंधित शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ऐसे शिक्षक यदि नियुक्ति के समय अप्रशिक्षित थे, लेकिन वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, तब भी उनका विवरण निर्धारित प्रपत्र में शामिल करना अनिवार्य होगा।

बर्खास्त शिक्षकों की पुनर्बहाली की भी होगी कार्रवाई

पत्र में पटना उच्च न्यायालय के एलपीए संख्या 748/2022 में 20 मार्च 2024 को पारित आदेश के तहत सेवा से बर्खास्त किए गए अप्रशिक्षित शिक्षकों का भी उल्लेख है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने ऐसे शिक्षकों को पुनः सेवा में बहाल करने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

तीन प्रपत्रों में मांगी गई रिपोर्ट

जिला शिक्षा पदाधिकारी के निर्देश के अनुसार, संबंधित विद्यालय प्रधानों को निर्धारित विवरण दो दिनों के भीतर उपलब्ध कराना होगा। इसके बाद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी प्राप्त रिपोर्टों की गहन जांच कर उन्हें समेकित करेंगे और अग्रसारण पत्र के साथ जिला कार्यालय को भेजेंगे।

– प्रपत्र-1: 31 मार्च 2015 तक या उससे पहले नियुक्त, वर्तमान में कार्यरत अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों का विवरण।

– प्रपत्र-2: एलपीए संख्या 748/2022 के तहत बर्खास्त, जिनकी उपस्थिति रोकी गई है अथवा जो वर्तमान में कार्य नहीं कर रहे हैं, ऐसे शिक्षकों की सूची।

– प्रपत्र-3: 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों का विवरण, भले ही वे वर्तमान में प्रशिक्षित हो चुके हों या स्थानीय निकाय शिक्षक, विशिष्ट शिक्षक, प्रधान शिक्षक अथवा नियमित शिक्षक के रूप में कार्यरत हों।

सूचना छिपाने पर कार्रवाई की चेतावनी

पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि किसी विद्यालय या प्रखंड स्तर पर सूचना छिपाने का प्रयास किया जाता है अथवा अधूरी रिपोर्ट सौंपी जाती है, तो इसे सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना के रूप में गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित शिक्षक, विद्यालय प्रधान, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और जिम्मेदार कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यदि किसी प्रखंड में इस श्रेणी का कोई शिक्षक नहीं है, तो वहां से तीनों प्रपत्रों में शून्य प्रतिवेदन देना होगा।

सत्यम ग्राम न्यूज़ की नजर: वैशाली में अब शिक्षा विभाग के सामने निर्धारित समयसीमा के भीतर शिक्षकों से संबंधित अभिलेखों का सत्यापन कर सही रिपोर्ट प्रस्तुत करने की चुनौती है। इस कार्रवाई का वास्तविक दायरा रिपोर्टों के संकलन, जांच और नियमानुसार आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा।

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Author: AKHILESH KUMAR

Editor in Chief