झौआ गाँव के लोगो का पहचान दिलाते छठ व्रत में उपयोग होने वाले आरता पात |

सोनपुर । सोनपुर अनुमंडल क्षेत्र के झौआ गांव का नाम चैत और कार्तिक छठ आरता के साथ हर की जुबान पर गुनगुनाने लगता है। इसका कारण है कि यहां एक गांव है जहां छठ में लाल महावर का निर्माण बड़े पैमाने पर होता है और इसका सप्लाई विभिन्नसारण, बैशाली, मुज़फ़्फ़रपुर, पटना सहित अन्य जिलों में किया जाता है इतना ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यो में निर्मित आरता पात के सप्लाई किया जाता है। यह गांव सारण जिला मुख्यालय छपरा शहर से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है।
छठ पर्व में लाल रंग वाले अर्थपात का उपयोग सूर्य देव के अर्ध देने के लिए किया जाता है ।पिछले करीब 100 वर्षों से पीठी दर पीढ़ी झौआ गांव में पवित्रता के साथ आरता का निर्माण कुशल कारिगर के द्वारा किया जाता है ।आरता के निर्माण के कारण इस गांव की एक अलग पहचान बन गई है। आरता पात के व्यापारी झौआ गांव में आकर थोक भाव में आरता खरीद कर ले जाते हैं तथा अपने माध्यम से बिहार और झारखंड राज्य सहित अन्य राज्यों तक इसकी बिक्री करते हैं।
झौआ ग्राम वासी चैत के 3 माह पूर्व तथा कार्तिक के 5 महा पूर्व से आरता पात का निर्माण करना शुरू कर देते हैं। इसका निर्माण हिंदू तथा मुसलमान परिवार के बच्चे से लेकर बृद्ध सदस्य द्वारा किया जाता है ।इसके निर्माता रमाकांत सहित अन्य लोगों बताते हैं कि आरता तो बहुत छोटी चीज है लेकिन इसके निर्माण में सजकता रखना पड़ता है ।पहले अकवन की रुई खरीद कर मशीन में बड़ी सावधानी पूर्वक धुनाई कर मैदा में मिलाकर रंग का गोल बनाया जाता है फिर सबको मिलकर उबालना तथा मिट्टी के बर्तन में रूई को गोल आकार देते हुए रंग डालना पड़ता है ।झौआ गांव के अधिकांश लोग इस धंधे में लगे रहते हैं । चैती छठ तथा कार्तिक छठ के पहले गांव हर घर के आगे खेतों तथा उसकी पगडंडियों पर झुरमुंडो में बिछे लाल पत्ते बड़े जतन से सुखाए जाते हैं इसके निर्माण के लिए अब मशीन भी आ गया है। इससे समय की बचत होती है । झौआ गांव के युवा पीढ़ी इस कला निर्माण के प्रति विशेष रुचि नहीं ले रहे हैं। कहते हैं कि अपने पूर्वजों को देखते आ रहा हूं काफी परिश्रम कर लाल महावर बनाते हैं लेकिन परिश्रम और लागत के अनुसार आर्थिक आय प्राप्त नहीं होता है । परिणाम स्वरूप इस धंधा में लगे लोग आज भी आर्थिक तंगी से तवाह है।यह धंधा गृह उधोग है जरूरत है आरता पात निर्माण के लिए सरकारी स्तर पर आर्थिक सहयोग करने की। आरता पात के निर्माण करते हुए इन गाँव के लोगो के लिए जीवकोपार्जन के लिए यह महत्वपूर्ण धंधा है ।
Author: SANJEET KUMAR
संवाददाता,सोनपुर