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विद्यालय के बिजली संबंध विच्छेद के बाद, बच्चे अन्यत्र जगह से पानी लाकर पिने क़ो मजबूर।
सत्यम ग्राम न्यूज़ कार्यालय, चेहराकलां : प्रखंड क्षेत्र के कुछ विद्यालय के द्वारा बिजली बिल भुगतान नहीं करने के कारण बिजली संबध विच्छेद कर दिया गया हैँ। विधुत संबंध विच्छेद से विद्यालय मे लगे समरसेबल पंप विधुत के आभव में बंद हो गया हैँ, पूर्व से स्कुल मे लगे चापाकल से गंदा पानी निकलता हैँ। जिसके कारण बच्चे पानी नहीं पी रहे हैँ. बच्चों क़ो इस उमस भरे गर्मी मे पानी नहीं मिलने के कारण स्कुल के बच्चे इर्द-गिर्द बने घर मे जाकर पानी लाने क़ो मजबूर हैँ कुछ बच्चे तो स्कुल से 500 मीटर ज्यादा की दुरी तय कर बोतल मे पानी लाने चाले जाते हैँ। जिससे दुर्घटना होने की सम्भवना से इंकार नहीं किया जा सकता हैँ।
“चेहराकला प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी रघुनाथ प्रसाद से मोबाइल पर सम्पर्क किया तो बताया गया की सम्बन्धित स्कुल के प्रधानाध्यापक से हमें लिखित सूचना देने क़ो बोला जाए तभी कुछ हो सकता हैँ.”
ऐसा लगता हैँ की प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी भी लापरवाह हो गए हैँ।
आखिर वह कौन सा विद्यालय जहाँ के बच्चे आधा किलोमीटर दुरी तय कर ड्रिंकिंग बोतल मे पानी भरने क़ो हैँ मजबूर|

चेहराकालं प्रखंड क्षेत्र के वस्ती सरसिकन पंचायत के बखरी दोआ राजकीय मध्मेय विधालय में विगत तीन दिन पहले बिजली बिल बकाया रहने के कारण विधुत संबंध विच्छेद बिजली विभाग चेहराकलां के द्वारा कर दिया गया था. ज़ब इस संदर्भ मे विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक कपिलदेव साह से पूछे जाने पर बताया की बिजली बिल मुझे मिला ही नहीं और नहीं ही क़ोई लिखित सूचना बिजली विभाग से प्राप्त हुआ. अगर मुझे बिजली बिल मिलता तो मै शिक्षा विभाग क़ो सूचित कर बिल भुगतान अवश्य करते बिजली कनेक्शन काटने से स्कुल परिसर मे लगे समरसेबल पंप बिजली के आभव मे बंद हो गया हैँ जिसके बजह से परेशानी बढ़ गया हैँ|
विधालय परिसर मे पूर्व से लगे चापाकल से गंदा पानी निकलता हैँ जिसके कारण बच्चे पानी नहीं पीते हैँ. स्कुल के अगल -बगल से पानी पिने क़ो मजबूर हैँ मै पानी की समस्या से निजात हेतु वैकल्पिक व्यवस्था जल्द करूंगा। ज़ब बिजली विभाग के कर्मी से पूछे जाने पर बताया की बिल बनता है लेकिन जिस श्रेणी मे बिल बनना चाहिए उस श्रेणी ने नहीं बनता था जिसके वजह से बिल मै स्कुल के प्रभारी क़ो नहीं दे पाया, मै इस संदर्भ मे बिजली विभाग के पदाधिकारी क़ो पूर्व मे सुचना दे चुके हैँ. लाइन कब कटा हैँ इसकी जानकारी मुझे नहीं हैँ।
Author: AKHILESH KUMAR
Editor in Chief