चेहराकलां के श्री राम-जानकी मठ जर्जर, ग्रामीणों ने अतिक्रमण हटाकर जीर्णोद्धार की उठाई मांग।

 

करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद उपेक्षा का शिकार धार्मिक धरोहर, ग्रामीण बोले—मठ की जमीन और संपत्ति को अतिक्रमण से कराया जाए मुक्त

चेहराकलां (वैशाली)।सत्यम ग्राम न्यूज़। संवाददाता।

चेहरा कलां प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में स्थित प्राचीन श्री राम-जानकी मठ इन दिनों देखभाल के अभाव में जर्जर अवस्था में पहुंचते जा रहे हैं। सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति बस्ती सरसी कन पंचायत के बखरी दोआ गांव स्थित श्री राम-जानकी मठ की बताई जा रही है, जहां वर्षों से नियमित रखरखाव नहीं होने के कारण भवन एवं अन्य संपत्तियां क्षतिग्रस्त होती जा रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मठ के पास करोड़ों रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्ति है, लेकिन वर्तमान में वहां कोई स्थायी साधु-संत निवास नहीं करते। इसके कारण मठ की देखरेख पूरी तरह प्रभावित हो गई है और धार्मिक धरोहर उपेक्षा का शिकार हो रही है।

नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि मठ के नाम लगभग दो एकड़ भूमि दर्ज है। आरोप है कि उस भूमि के एक हिस्से पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर खेती-बाड़ी शुरू कर दी है, जबकि कुछ स्थानों पर आवासीय मकान एवं दुकान भी बना ली गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अतिक्रमण और प्रबंधन के अभाव के कारण कोई भी साधु-संत वहां रहना पसंद नहीं करता।

ग्रामीणों ने बताया कि मठ परिसर की भूमि पर प्रत्येक वर्ष भव्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेले का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और आर्थिक गतिविधियां भी होती हैं। इसके बावजूद मठ की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।

मठ के लिए भूमि दान करने वाले परिवार के सदस्यों ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन से मठ की भूमि एवं अन्य संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराने तथा मठ के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार की मांग की है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मोहम्मदपुर टुरी गांव स्थित श्री राम-जानकी मठ की स्थिति भी लगभग ऐसी ही है। वहां भी अतिक्रमण और देखरेख के अभाव में मठ जर्जर हो चुका है तथा साधु-संतों का निवास नहीं होने से नियमित पूजा-पाठ भी प्रभावित हो गया है। श्रद्धालुओं ने दोनों मठों के संरक्षण और धार्मिक गतिविधियों के पुनर्जीवन के लिए प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है.

नोट: इस समाचार में अतिक्रमण एवं संपत्ति संबंधी आरोप स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ता के दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होना शेष है।

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AKHILESH KUMAR
Author: AKHILESH KUMAR

Editor in Chief