“वीडियो वायरल, दावे अलग-अलग… अब जांच बताएगी असली सच!”

सत्यम ग्राम न्यूज़ | डिजिटल न्यूज़ डेस्क | 3 सितंबर 2026 | एसजीएन ब्यूरो : भगवानपुर (वैशाली): जी.ए. उच्च विद्यालय, भगवानपुर की सफाई व्यवस्था और विद्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित फोटो एवं वीडियो के बाद सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री में कथित तौर पर कुछ विद्यार्थियों को विद्यालय के बगल की दुकान से चाय लाकर शिक्षक को देते हुए दिखाई देने का दावा किया गया है। इसके अलावा विद्यालय परिसर में सफाई से जुड़ी गतिविधियों के दृश्य भी सामने आने की बात कही गई है।
हालांकि, वायरल वीडियो की वास्तविक रिकॉर्डिंग तिथि की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
शैक्षणिक कार्य के दौरान बच्चों से चाय मंगाने का आरोप
शिकायतकर्ता द्वारा साझा किए गए वीडियो में कथित तौर पर एक विद्यार्थी विद्यालय के बगल की दुकान से चाय खरीदकर शिक्षक को देते हुए दिखाई दे रहा है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यह वीडियो वर्तमान समय का है और शैक्षणिक कार्य के दौरान का है। ऐसे में विद्यार्थियों से इस प्रकार का गैर-शैक्षणिक कार्य कराया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
वीडियो के एक अन्य दृश्य में एक विद्यार्थी के विद्यालय परिसर में चाय बनाते हुए दिखाई देने का भी दावा किया गया है।
इसके अलावा, एक दृश्य में शौचालय की सफाई किए जाने तथा एक विद्यार्थी के हाथ में कूड़ेदान लेकर जाते हुए दिखाई देने की बात शिकायतकर्ता ने कही है।
इन दृश्यों को लेकर शिकायतकर्ता ने विद्यालय की कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों से कथित रूप से कराए जा रहे कार्यों पर सवाल उठाते हुए शिक्षा विभाग से जांच की मांग की है।
विद्यालय के विभिन्न कोषों से कथित अवैध निकासी का आरोप
शिकायतकर्ता ने विद्यालय के विभिन्न कोषों से कथित अवैध निकासी का आरोप लगाते हुए विद्यालय की वित्तीय व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि, इस आरोप के समर्थन में शिकायतकर्ता द्वारा फिलहाल कोई दस्तावेजी साक्ष्य अथवा लिखित शिकायत उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में वित्तीय अनियमितता के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसे शिकायतकर्ता के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि कुछ माह पूर्व विद्यालय में नामांकन के दौरान कथित अवैध उगाही का मामला सामने आया था, जिस पर जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से स्पष्टीकरण मांगा गया था। इस पुराने मामले की वर्तमान स्थिति संबंधित विभागीय रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगी।
वीडियो करीब एक सप्ताह पुराना होने का दावा
शिकायतकर्ता का दावा है कि वायरल वीडियो लगभग एक सप्ताह पुराना है। वहीं, वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधियों की वास्तविक तारीख, स्थान, संबंधित व्यक्तियों की पहचान और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि सत्यम ग्राम न्यूज़ द्वारा नहीं की जा सकी है।
सफाई व्यवस्था पर भी सवाल
शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई फोटो-वीडियो सामग्री में विद्यालय परिसर एवं शौचालय की सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि विद्यालय में स्वच्छता व्यवस्था की नियमित निगरानी और जांच होनी चाहिए। हालांकि, वायरल सामग्री वर्तमान समय की है या पुरानी, यह फिलहाल जांच का विषय है।
प्राचार्या ने वीडियो को बताया करीब दो वर्ष पुराना
मामले में जी.ए. उच्च विद्यालय भगवानपुर की प्राचार्या अर्चना कुमारी से सत्यम ग्राम न्यूज़ की टीम ने व्हाट्सऐप चैट एवं वॉइस कॉल के माध्यम से संपर्क कर विद्यालय का पक्ष जाना।
प्राचार्या ने शिकायतकर्ता द्वारा साझा किए गए फोटो एवं वीडियो को करीब दो वर्ष पुराना बताते हुए कहा कि यह सामग्री उस समय चलाए गए स्वच्छता अभियान से संबंधित है। उनके अनुसार, उस अभियान के दौरान बच्चों द्वारा सफाई गतिविधियों में भाग लिया गया था।
प्राचार्या ने बताया कि उस समय स्वच्छता अभियान में शामिल शिक्षक अब अन्य विद्यालयों में स्थानांतरित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जी.ए. उच्च विद्यालय को ‘मॉडल विद्यालय’ के रूप में जाना जाता है।
प्राचार्या ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में बच्चों से विद्यालय परिसर अथवा शौचालय की सफाई किसी शिक्षक या उनके द्वारा नहीं कराई जाती है।
वायरल सामग्री और शिकायत में लगाए गए आरोपों को प्राचार्या ने बेबुनियाद और निराधार बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने पहचान गोपनीय रखने का किया अनुरोध
मामले को सामने रखने वाले स्थानीय शिकायतकर्ता ने अपनी सुरक्षा एवं व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पहचान सार्वजनिक नहीं करने का अनुरोध किया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के हित में विद्यालय की व्यवस्था में सुधार कराना है।
एक सप्ताह पुराना या दो वर्ष पुराना? वीडियो की तिथि बनी मुख्य सवाल
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल वायरल वीडियो की वास्तविक रिकॉर्डिंग तिथि को लेकर है।
शिकायतकर्ता वीडियो को लगभग एक सप्ताह पुराना बता रहे हैं, जबकि प्राचार्या के अनुसार वही सामग्री करीब दो वर्ष पुरानी है। दोनों दावों के बीच स्पष्ट अंतर होने के कारण वीडियो की मूल रिकॉर्डिंग, मेटाडेटा अथवा अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर इसकी वास्तविक तिथि की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
शिक्षा विभाग की जांच से साफ हो सकती है तस्वीर
यदि शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालय का स्थलीय निरीक्षण कराया जाता है तो वर्तमान सफाई व्यवस्था, विद्यार्थियों से कथित रूप से गैर-शैक्षणिक कार्य कराए जाने, विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था तथा वायरल फोटो-वीडियो की वास्तविकता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
वहीं, विद्यालय के विभिन्न कोषों से कथित अवैध निकासी के आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित वित्तीय अभिलेखों की जांच आवश्यक होगी।
उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय अभिभावकों एवं ग्रामीणों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी तथा जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित होना चाहिए।
सत्यम ग्राम न्यूज़ ने इस खबर में शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के साथ विद्यालय की प्राचार्या का पक्ष भी प्रमुखता से शामिल किया है। वायरल फोटो-वीडियो की वास्तविक तिथि, उसमें दिखाई दे रही गतिविधियों की परिस्थितियां तथा लगाए गए अन्य आरोपों की सत्यता स्वतंत्र अथवा विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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Author: AKHILESH KUMAR
Editor in Chief