आदेश, जांच और रिपोर्ट के बावजूद कोचिंग व निजी विद्यालयों पर कार्रवाई क्यों नहीं? वैशाली की शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

 

 

सरकारी शिक्षकों के निजी कोचिंग में पढ़ाने के आरोप, विद्यालय अवधि में कोचिंग संचालन की शिकायत और पूर्व में नोटिस पाए निजी विद्यालयों की गतिविधियों पर भी आरोप।

सत्यम ग्राम न्यूज़  ब्यूरो | वैशाली

हाजीपुर/वैशाली। जिले में निजी कोचिंग संस्थानों और निजी विद्यालयों के संचालन को लेकर शिक्षा विभाग की निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से कोचिंग संस्थानों की जांच और सरकारी शिक्षकों की संलिप्तता की पड़ताल के निर्देश जारी किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर ऐसे संस्थानों के लगातार संचालित रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

मामला सिर्फ कोचिंग संस्थानों तक सीमित नहीं है। जिले में कुछ ऐसे निजी विद्यालयों के संचालन की भी शिकायत है, जिन्हें पूर्व में विभागीय स्तर पर चिन्हित कर नोटिस दिए जाने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद संबंधित संस्थानों की वर्तमान स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

जून में जारी हुआ था जांच का आदेश

जिला शिक्षा पदाधिकारी, वैशाली के कार्यालय से जारी ज्ञापांक-1230, दिनांक 13 जून 2026 के पत्र में सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को अपने-अपने प्रखंड क्षेत्र में संचालित कोचिंग संस्थानों की सघन जांच करने का निर्देश दिया गया था।

पत्र में कोचिंग संस्थान का नाम-पता, संचालक का नाम एवं संपर्क नंबर तथा जांच के दौरान किसी सरकारी शिक्षक की संलिप्तता पाई गई या नहीं, इसकी जानकारी निर्धारित प्रपत्र में उपलब्ध कराने को कहा गया था।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सरकारी विद्यालय का कोई शिक्षक विद्यालय परिसर के अंदर या बाहर संचालित कोचिंग, निजी ट्यूशन अथवा व्यावसायिक शिक्षण संस्थान में पढ़ाने के कार्य में संलिप्त पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।

यह आदेश माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बिहार, पटना के पत्रांक 11/नियमावली-1-1/2021 (अंश-1) 613, दिनांक 11 जून 2026 के संदर्भ में जारी किया गया था।

जांच हुई तो रिपोर्ट कहां है?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी के आदेश के बाद प्रखंड स्तर पर कितने कोचिंग संस्थानों की जांच हुई और उन जांचों का परिणाम क्या रहा?

वैशाली जिले के प्रखंड स्तरीय शिक्षा विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी स्तर से जांच-पड़ताल की जाती है और जांच रिपोर्ट जिला स्तर पर समर्पित की जाती है।

कर्मचारी के अनुसार, जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसके बाद सक्षम प्राधिकारी के स्तर से नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

इस जानकारी के बाद अब सवाल यह है कि यदि जांच रिपोर्ट जिला स्तर पर पहुंच रही है, तो उन रिपोर्टों के आधार पर अब तक क्या कार्रवाई की गई?

बिहार में कोचिंग संस्थानों के लिए कानून भी मौजूद

बिहार में Bihar Coaching Institute (Control & Regulation) Act, 2010 लागू है। India Code पर उपलब्ध अधिनियम के अनुसार यह राज्य का शिक्षा विभाग से संबंधित कानून है और इसका उद्देश्य कोचिंग संस्थानों के नियंत्रण एवं विनियमन से जुड़ा है।

इसलिए कोचिंग संस्थानों के मामले में केवल जांच कर रिपोर्ट तैयार करना ही पूरी प्रक्रिया नहीं है। यदि जांच में कानून या निर्धारित नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई का प्रश्न उठता है।

यही वजह है कि वैशाली में अब जांच रिपोर्टों की स्थिति और उन पर हुई कार्रवाई सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है।

विद्यालय अवधि में कोचिंग संचालन की शिकायत

स्थानीय स्तर से यह शिकायत भी सामने आ रही है कि कुछ कोचिंग संस्थानों में ऐसे छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं, जो किसी सरकारी विद्यालय में नामांकित हैं।

आरोप यह भी है कि कुछ स्थानों पर विद्यालय के निर्धारित समय के दौरान भी कोचिंग कक्षाएं संचालित होती हैं।

यदि ऐसी शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित कोचिंग संस्थान के साथ-साथ विद्यार्थियों की विद्यालयी उपस्थिति और संबंधित विद्यालय के संचालन की स्थिति की भी जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

मसलन—

विद्यालय में विद्यार्थी की उपस्थिति दर्ज है या नहीं?

जिस समय विद्यालय में कक्षा संचालित होनी चाहिए, उस समय विद्यार्थी कोचिंग में क्यों मौजूद हैं?

विद्यालय की उपस्थिति पंजी और वास्तविक उपस्थिति में कोई अंतर तो नहीं?

विद्यालय अवधि में कोचिंग संचालित करने की शिकायत की जांच किस स्तर पर हुई?

जांच के बाद क्या कार्रवाई की गई?

इन सवालों का जवाब केवल स्थल निरीक्षण और संबंधित अभिलेखों की जांच से ही स्पष्ट हो सकता है।

सरकारी शिक्षकों के कोचिंग में पढ़ाने के आरोप

इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू सरकारी शिक्षकों के निजी कोचिंग संस्थानों में कथित रूप से पढ़ाने से जुड़ा है।

सत्यम ग्राम न्यूज़ को चेहराकलां प्रखंड क्षेत्र में कथित रूप से सरकारी शिक्षक द्वारा कोचिंग में पढ़ाने से संबंधित कुछ फोटो, ऑडियो और वीडियो सामग्री प्राप्त हुई है।

हालांकि इन सामग्री की सत्यता, समय, स्थान और संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि अभी की जा रही है। इसलिए सत्यापन से पहले किसी शिक्षक को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

सत्यम ग्राम न्यूज़ इन साक्ष्यों की सत्यता की पुष्टि के बाद अगले संस्करण में इस मामले की विस्तृत खबर प्रकाशित करेगा। संबंधित शिक्षक, कोचिंग संचालक और शिक्षा विभाग का पक्ष भी लिया जाएगा।

निजी विद्यालयों का मामला भी गंभीर

इधर, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बिना आवश्यक मान्यता/प्रस्वीकृति के निजी विद्यालय संचालित किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

स्थानीय स्तर पर यह जानकारी सामने आई है कि कुछ निजी विद्यालयों को पूर्व में विभाग द्वारा चिन्हित कर नोटिस दिए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन नोटिस के बाद उनकी वर्तमान स्थिति क्या है, इस पर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी विद्यालय को केवल शिकायत के आधार पर “अवैध विद्यालय” घोषित नहीं किया जा सकता। संबंधित विद्यालय की मान्यता/प्रस्वीकृति, विभागीय रिकॉर्ड, नोटिस, निरीक्षण रिपोर्ट और वर्तमान आदेश की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

केंद्र के Right to Education Act, 2009 की धारा 18 में मान्यता के बिना स्कूल स्थापित या संचालित करने पर प्रावधान हैं। मान्यता वापस लिए जाने की स्थिति में भी स्कूल के संचालन पर रोक तथा दंड का प्रावधान कानून में दिया गया है।

इसलिए जिन विद्यालयों के संबंध में पूर्व में नोटिस या जांच की बात सामने आ रही है, उनकी वर्तमान वैधानिक स्थिति की विभागीय समीक्षा महत्वपूर्ण है।

               “जांच होती है, रिपोर्ट जाती है, फिर कार्रवाई क्यों नहीं?”

प्रखंड स्तरीय शिक्षा विभाग के कर्मचारी के कथित बयान के बाद इस पूरे मामले का सबसे अहम प्रश्न यही बनता है।

यदि—

• प्रखंड स्तर पर जांच हुई,

• जांच रिपोर्ट तैयार हुई,

• रिपोर्ट जिला स्तर पर भेजी गई,

और जांच में कार्रवाई योग्य तथ्य पाए गए,

तो उसके बाद संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा क्या निर्णय लिया गया?

और यदि किसी मामले में कार्रवाई नहीं की गई तो उसका कारण क्या है?

• क्या रिपोर्ट में अनियमितता नहीं पाई गई?

• क्या संस्थान को सुधार का समय दिया गया?

• क्या मामला किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी के पास लंबित है?

• क्या नोटिस का जवाब संतोषजनक पाया गया?

या फिर कार्रवाई की प्रक्रिया अभी शुरू ही नहीं हुई?

इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और प्रशासन ही स्पष्ट कर सकता है।

अधिकारियों की मिलीभगत की चर्चा, लेकिन जांच जरूरी

स्थानीय बुद्धिजीवियों के एक वर्ग ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि नियमों के उल्लंघन की शिकायतें लगातार सामने आती हैं और पूर्व में कुछ संस्थानों को नोटिस भी दिए गए हैं, तो फिर लगातार संचालन की स्थिति कैसे बनी हुई है।

इसी क्रम में कुछ लोगों द्वारा प्रखंड स्तर के अधिकारियों और संबंधित संस्थानों के बीच संभावित मिलीभगत की आशंका भी व्यक्त की गई है।

हालांकि यह फिलहाल एक आरोप/आशंका है, प्रमाणित तथ्य नहीं। किसी अधिकारी या कर्मचारी पर मिलीभगत का आरोप बिना ठोस साक्ष्य के तथ्य के रूप में प्रकाशित करना उचित नहीं होगा। इसलिए यदि ऐसी शिकायतें हैं तो उनकी स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है।

कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी?

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग प्रकार के मामलों में कार्रवाई की वैधानिक शक्ति अलग-अलग कानूनों और नियमों से निर्धारित होती है।

कोचिंग संस्थानों के मामले में बिहार का Coaching Institute (Control & Regulation) Act, 2010 लागू है।

वहीं निजी स्कूलों के मामले में मान्यता और संचालन से संबंधित प्रावधान RTE Act तथा लागू राज्य नियमों के अनुसार देखे जाने होते हैं। इसलिए यह कहना कि हर मामले में केवल जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिलाधिकारी या अनुमंडल पदाधिकारी ही कार्रवाई/सीलिंग कर सकते हैं, संबंधित कानून और मामले की प्रकृति देखे बिना सही नहीं होगा।

इसलिए विभाग से यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किस मामले में कौन-सा सक्षम प्राधिकारी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार है और संबंधित फाइल वर्तमान में किस स्तर पर लंबित है।

अब जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से ये सवाल

1. 13 जून 2026 के आदेश के बाद वैशाली जिले में कितने कोचिंग संस्थानों की जांच हुई?

2. कितने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों ने जांच रिपोर्ट जिला स्तर पर जमा की?

3. कितने मामलों में सरकारी शिक्षक की कोचिंग में संलिप्तता पाई गई?

4. यदि संलिप्तता पाई गई तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?

5. विद्यालय अवधि में कोचिंग संचालन की शिकायतों की कितनी जांच हुई?

6. पूर्व में नोटिस दिए गए निजी विद्यालयों की वर्तमान स्थिति क्या है?

7. कितने निजी विद्यालयों की मान्यता/प्रस्वीकृति की जांच की गई?

8. जिन संस्थानों में अनियमितता मिली, उनके विरुद्ध आगे की कार्रवाई क्यों और किस स्तर पर लंबित है?

9. यदि जांच रिपोर्ट में अनियमितता नहीं मिली तो क्या संबंधित रिपोर्ट सार्वजनिक की जा सकती है?

10. यदि कार्रवाई लंबित है तो जिम्मेदार स्तर और लंबित रहने का कारण क्या है?

सत्यम ग्राम न्यूज़ की अगली पड़ताल

सत्यम ग्राम न्यूज़ को चेहराकलां प्रखंड क्षेत्र में सरकारी शिक्षक के कथित रूप से कोचिंग में पढ़ाने से संबंधित फोटो, ऑडियो और वीडियो सामग्री प्राप्त हुई है। इनकी सत्यता की पुष्टि की जा रही है।

सत्यापन के बाद संबंधित मामले को अगले संस्करण में तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के साथ सामने रखा जाएगा। संबंधित शिक्षक, कोचिंग संचालक और शिक्षा विभाग का पक्ष भी शामिल किया जाएगा।

सत्यम ग्राम न्यूज़ का उद्देश्य किसी व्यक्ति, शिक्षक, अधिकारी या संस्था को बिना सत्यापन दोषी ठहराना नहीं, बल्कि विभागीय आदेश, जांच प्रक्रिया, उपलब्ध दस्तावेज, साक्ष्य और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर वास्तविक स्थिति को सामने रखना है।

मुख्य मुद्दा

सवाल सिर्फ यह नहीं है कि जांच हुई या नहीं। असली सवाल यह है कि जांच के बाद रिपोर्ट में क्या पाया गया और यदि नियमों का उल्लंघन मिला तो सक्षम स्तर से आगे क्या कार्रवाई हुई?

अब इस पूरे मामले में जिला शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।

— अखिलेश कुमार

                   मुख्य संपादक, सत्यम ग्राम न्यूज़ नेटवर्क 

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आधिकारिक संदर्भ: वैशाली जिला प्रशासन की वेबसाइट पर जिला शिक्षा पदाधिकारी का विवरण उपलब्ध है; जिला संपर्क निर्देशिका में जिलाधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारियों के संपर्क विवरण भी प्रकाशित हैं।

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Author: AKHILESH KUMAR

Editor in Chief