
वैशाली (भगवानपुर)।सत्यम ग्राम न्यूज़: बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने की दिशा में वैशाली जिले में प्रयास तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में भगवानपुर प्रखंड के प्रतापटांड और सहथा गांवों में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस अभियान को स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान द्वारा जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन परियोजना के सहयोग से चलाया जा रहा है।
कार्यक्रम में संस्थान के सचिव सह परियोजना निदेशक सुधीर कुमार शुक्ला ने बताया कि यह पहल वैशाली को बाल विवाह मुक्त जिला घोषित कराने की दिशा में एक सशक्त प्रयास है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को बाल विवाह के दुष्परिणाम, बाल अधिकार, बाल श्रम, यौन शोषण, और बाल तस्करी जैसे संवेदनशील मुद्दों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त राष्ट्र बनाना है।
अभियान के अधिकार मित्र संतोष कुमार ने चिंता जताई कि वैशाली जिले में अभी भी 47% मामलों में बाल विवाह की पुष्टि हो रही है, जो समाज के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि देशभर में हर एक मिनट में तीन बाल विवाह के मामले दर्ज हो रहे हैं।
संतोष कुमार ने बताया कि वैशाली में बाल विवाह का मुख्य कारण अशिक्षा, गरीबी, और जागरूकता की कमी है। हालांकि प्रशासन और सामाजिक संगठनों की मदद से इस कुप्रथा को जड़ से खत्म करने की कोशिशें जारी हैं।
वक्ताओं ने ग्रामीणों से अपील की कि यदि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले तो तुरंत 1098 (बाल सहायता हेल्पलाइन) या 112 (आपातकालीन सेवा) पर संपर्क करें।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, किशोर-किशोरियों और अभिभावकों की भागीदारी देखने को मिली।
अंत में सभी ने बाल विवाह के खिलाफ आवाज़ उठाने और समाज को जागरूक करने का संकल्प लिया।
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Author: AKHILESH KUMAR
Editor in Chief