
सत्यम ग्राम न्यूज़, राजापाकर /वैशाली : जिले के प्रखंड क्षेत्र के राजापाकर दक्षिणी पंचायत के उत्तर टोला वार्ड नंबर एक निवासी विनोद कुमार सिंन्हा के 25 वर्षीय पुत्र गौतम कुमार सिन्हा के नई नदिल्ली में छात्रावास की सातवीं मंजिल से खुद कर आत्महत्या करने से सम्बंधित घटना की खबर सुनकर परिजनों का रो-रोकर हो रहा था बुरा हाल हो गया है।

घटना बीते रविवार के शाम की है। बताते चले कि गौतम कुमार सिन्हा दिल्ली में इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के अंतर्गत गुरु गोविंद सिंह कॉलेज में एमबीए के प्रथम वर्ष का छात्र था। घटना से तीन दिन पहले गौतम सहित पांच छात्रों पर छात्रावास में शराब एवं गांजा के सेवन का आरोप लगाते हुए हॉस्टल के वार्डन ने निष्कासित कर दिया था और सभी को रविवार को हॉस्टल खाली करने का निर्देश दिया था जबकि मृतक के पिता विनोद कुमार सिन्हा ने बताया कि उनका पुत्र किसी प्रकार के नशा सेवन नहीं करता था हॉस्टल के वार्डन द्वारा उन पर गलत आरोप लगाया गया है।
जब हॉस्टल में मृतक पर कार्रवाई की गई तो हॉस्टल के वार्डन द्वारा उसके गार्जियन को सूचना क्यों नहीं दी गई लेकिन एक भी कॉल छात्रावास के वार्डन द्वारा मुझे नहीं किया गया।यह घटना एक सोची समझी साजिश है। बिहारी छात्रों के साथ दूसरे प्रदेशों में इसी तरह व्यवहार किया जाता है। ऐसी कई घटनाएं दूसरे प्रदेशों में रहने वाले छात्र-छात्राओं के साथ घटित हो चुकी है।गौतम ने ऐसी घटना घटित होने पर अवसाद में आकर यह बड़ा कदम उठा लिया।
मरने से पहले उसने रविवार की शाम अपने पिता विनोद कुमार सिंहान के मोबाइल पर मैसेज भी किया सॉरी मम्मी पापा भैया भाभीँ मैं हॉस्टल के वार्डन के चलते सुसाइड कर रहा हूं। मैसेज पढ़ते ही परिजन दिल्ली के लिए रविवार की शाम फ्लाइट से रवाना हुए एवं उनके गांव के अन्य परिजन जो दिल्ली में रहते थे वह भी घटना की सूचना पाकरश मौके पर पहुंचे। लेकिन सब कुछ खत्म हो गया था।
गौतम का शव कैंपस में पड़ा हुआ था। मृतक के पिता विनोद कुमार सिन्हा ने बताया कि मैं जब दिल्ली पहुंचा तो वहां कोई मदद करने वाला नहीं था न ही पुलिस प्रशासन और न ही कॉलेज प्रशासन।सब गौतम पर ही आरोप लगा रहे थे कि उसने गलत किया है।वही गौतम के कालेज के दर्जन
छात्राएं स्कूल में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं उन लोगों का कहना है कि गौतम पर लगाया गया आरोप गलत है। वह कोई नशा नहीं करता था। यदि उसने शराब गांजे का सेवन किया था तो उसका मेडिकल क्यों नहीं कराया गया। मंगलवार की सुबह 8 दिल्ली से शव घर पर पहुंचते ही परिजनों ,ग्रामीणों सहित सैकड़ो लोगों का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा था। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि गौतम दो भाई था जिसमें बड़ा भाई एवं उसकी पत्नी दोनो आईआईटियन हैं दोनों बेंगलुरु में रहते हैं। छोटा भाई गौतम की भी अपने गांव में बहुत ही सभ्य एवं सज्जन लड़कों में गिनती होती थी। पढ़ाई लिखाई में भी मेधावी था।उसे किसी प्रकार के नशे का आदी नहीं था।
उसके पिता विनोद कुमार सिंहा एक निजी विद्यालय में प्राचार्य हैं।उन्होंने जागरुक होने के कारण अपने सभी बच्चों को पढ़ाया लिखया एवं ऊंची मुकाम पर पहुंचाया़।
लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस बच्चे को पढने के लिए दिल्ली भेज रहे हैं वह पढ़ लिखकर गांव नहीं आएगा बल्कि उसका शव घर पर आएगा। यह उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था। वही उनके पिता ने दिल्ली प्रशासन पर एवं कॉलेज की व्यवस्था पर आक्रोश व्यक्त किया। असके दादा कमलेश्वर सिंह शिक्षित एवं योग्य व्यक्तियों में गिने जाते हैं।
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रिपोर्ट : मनीष कुमार, सत्यम ग्राम न्यूज़ नेटवर्क
Author: AKASH CHANDRA VERMA
ब्यूरो चीफ, वैशाली