चेहराकलां के देवेंद्र राय के आवेदन पर कांड संख्या 79/2026, पांच नामजद समेत अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी

चेहराकलां/वैशाली। कटहरा थाना क्षेत्र के चेहराकलां गांव में जमीन से जुड़े कथित फर्जी एवं कूटरचित चकबंदी आदेश को न्यायालय में साक्ष्य के रूप में पेश करने और जमीन पर कब्जे का प्रयास करने के आरोप में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। यह मामला आरटीआई कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र राय, पिता स्व. युगेश्वर राय के लिखित आवेदन पर दर्ज किया गया है।
उपलब्ध प्राथमिकी संबंधी दस्तावेज पर दर्ज विवरण के अनुसार, कटहरा थाना कांड संख्या 79/2026 में BNS की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और अनुसंधान की जिम्मेदारी पुलिस अधिकारी को सौंपी गई है।
जमीन के दस्तावेज और कथित फर्जी आदेश का मामला
देवेंद्र राय के आवेदन के अनुसार, चेहराकलां मौजा की उनकी जमीन रिविजनल सर्वे खाता संख्या 547, खेसरा संख्या 3201 से संबंधित है। आवेदन में बताया गया है कि जमीन का एक हिस्सा वर्ष 2013 में निबंधित केवाला के माध्यम से खरीदा गया था तथा उस पर जमाबंदी संख्या 1716 दर्ज होने और लगान भुगतान का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन पर कब्जा करने की नीयत से आरोपियों द्वारा चकबंदी पदाधिकारी, गोरौल और उप निदेशक चकबंदी, वैशाली के नाम से कथित फर्जी एवं कूटरचित आदेश तैयार कराए गए।
इन दस्तावेजों को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, वैशाली के न्यायालय में परिवाद पत्र संख्या 507/2025 में साक्ष्य के रूप में दाखिल किए जाने का आरोप लगाया गया है।
तीन सदस्यीय जांच में फर्जी होने की पुष्टि का दावा
आवेदन में कहा गया है कि जब शिकायतकर्ता ने संबंधित चकबंदी आदेश की नकल/चिरकुट प्राप्त करने का प्रयास किया तो रिकॉर्ड में उक्त आदेश नहीं मिला। इसके बाद मामले की शिकायत जिलाधिकारी, वैशाली से की गई।
आवेदन के अनुसार, जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीओ महुआ, डीसीएलआर महुआ और सीओ चेहराकलां की तीन सदस्यीय टीम ने जांच की। संयुक्त जांच प्रतिवेदन पत्रांक 736 दिनांक 25.03.2026 का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि जांच में चकबंदी न्यायालय के दोनों कथित आदेशों को फर्जी एवं कूटरचित पाया गया।
इसके अलावा आवेदन में उप निदेशक चकबंदी, वैशाली के जांच प्रतिवेदन पत्रांक 15/चक दिनांक 24.03.2026 का भी उल्लेख है।
दस्तावेज में अंचल अधिकारी चेहराकलां के पत्रांक 197 दिनांक 25.02.2026 का भी संदर्भ दिया गया है।
पुराने मामले और हाईकोर्ट के जमानत आदेश का भी उल्लेख
आवेदन में गोरौल-कटहरा थाना कांड संख्या 521/2024, सेशन केस संख्या 441/2025 का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि कुछ नामजद आरोपी इस मामले में न्यायिक हिरासत में जेल गए थे।
शिकायतकर्ता ने पटना हाईकोर्ट के CRI. MISC. No. 76194/25 के दिनांक 05.12.2025 के जमानत आदेश का भी हवाला दिया है। आवेदन में जमानत आदेश की शर्त के रूप में अंग्रेजी में दर्ज वाक्य—
“That the petitioners shall not directly or indirectly involve in any criminal activity”
का उल्लेख किया गया है।
जमीन पर बोआई और धमकी का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, जेल से लौटने के बाद कथित चकबंदी आदेश का हवाला देकर 14 दिसंबर 2025 को उनकी जमीन में गेहूं की बोआई कर दी गई। इसके बाद 1 अगस्त 2026 को धान की रोपनी किए जाने का भी आरोप आवेदन में लगाया गया है।
आवेदन के एक बिंदु में यह भी आरोप लगाया गया है कि 20 मई 2025 को कुछ लोग उनके घर पहुंचे और कथित चकबंदी आदेश एवं दस्तावेजों की प्रतियां दिखाकर जमीन पर आने से मना किया तथा धमकी दी।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पांच नामजद समेत अज्ञात लोगों पर आरोप
आवेदन में निम्न पांच लोगों को नामजद किया गया है—
1. अशोक राय, 2. जीतलाल राय उर्फ जीतु राय, 3. नेवालाल राय उर्फ नेवी राय, 4. माया राय, 5. महापति देवी
सभी के चेहराकलां निवासी होने का उल्लेख आवेदन में किया गया है। इसके अलावा 3-4 अज्ञात व्यक्तियों, एक अज्ञात ट्रैक्टर और ट्रैक्टर चालक का भी उल्लेख है।
पुराने दस्तावेजों में भी फर्जीवाड़े का आरोप
आवेदन के बिंदु-9 से 11 में वर्ष 1941 के कथित केवाला दस्तावेज, खाता संख्या 93, खेसरा संख्या 2014 एवं 2013 से संबंधित दस्तावेजों का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ता ने इनमें भी कथित कूटरचना और गलत प्रविष्टि किए जाने का आरोप लगाया है।
आवेदन के अनुसार, इस संबंध में पूर्व में भी जांच एवं प्राथमिकी से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। कटहरा ओपी के डीआर-655/17 दिनांक 21.08.2017, जिला अवर निबंधक, मुजफ्फरपुर के जांच प्रतिवेदन तथा अन्य दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में संलग्न किए जाने की बात कही गई है।
किन धाराओं में मामला?
उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318(4), 338, 340(2), 229(1), 61(2), 3(5) और 111 का उल्लेख है।
मामले की जांच के दौरान पुलिस कथित फर्जी दस्तावेजों की वास्तविकता, उन्हें तैयार करने वालों, न्यायालय में दाखिल किए जाने की परिस्थितियों और जमीन पर कब्जे के आरोपों की जांच करेगी।
Note: यह रिपोर्ट शिकायतकर्ता के आवेदन एवं उपलब्ध दस्तावेजों में दर्ज आरोपों/दावों पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। नामजद आरोपियों का पक्ष इस दस्तावेज में उपलब्ध नहीं है। उनका पक्ष/पुलिस का आधिकारिक बयान प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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Author: AKHILESH KUMAR
Editor in Chief