गर्मी में चमकी बुखार से वचाब का पूर्ण तैयारी में राजापाकर स्वास्थ विभाग

एईएस चमकी रोग से बचाव हेतु सीएचसी राजापाकर में बना वार्ड।
वैशाली /राजापाकर : तापमान में वृद्धि होने से बच्चों में होने वाली चमकी बीमारी जिसे कई नाम जैसे जापानी इन्सेफेलाइटिस,दिमागी बुखार आदि नाम से जाना जाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजापाकर पूर्णतः अलर्ट मोड में है। इस रोग से बचाव के लिए नोडल चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मियों की अलग से तैनाती करने के साथ-साथ अस्पताल में अलग वार्ड बनाए गए हैं। इसके लिए दो बेड सुलभ किए गए हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने पर अलग से भी व्यवस्था की गई है।

इस बीमारी से निजात पाने के लिए चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी अलर्ट मोड में हैं। सोमवार को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर श्रीप्रकाश उपाध्याय ( एस पी उपाध्याय)ने बताया इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों के बीच जागरूकता फैलाई जा रही है। इस बीमारी की रोकथाम में सीएचओ, आशा फैसिलिटेटर, आशा एवं आंगनबाड़ी सेविका की सामुदायिक स्तर की गतिविधियां जारी है। इसके अनुपालन हेतु कई निर्देश जारी किए गए हैं।
शोध में पाया गया है की लीची के बीज अधपके एवं पके लीची के फल में एक ऐसा रसायन है जो घातक है। इस रोग से बचाव के लिए माताओं को सलाह दी गई है कि बिना रात में खाना खाए बच्चे सोए नहीं। साफ सफाई पर विशेष ध्यान दें। इसी तरह अन्य प्रकार की हिदायतें दी गई हैं ।इस बीमारी के लक्षण कि सरदर्द तेज होना तेज बुखार आना शरीर में चमकी होना अथवा हाथ पैर में थरथराहट होना पूरे शरीर या किसी खास अंग में लकवा मार देना या हाथ पैर का अकड़ जाना बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक संतुलन ठीक नहीं होना आदि शामिल हैं।प्राथमिक उपचार के लिए ओ आर एस या ग्लूकोस या नमक चीनी एवं नींबू का शरबत पिलाना चाहिए। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने यह भी बताया कि अभी तक कहीं से ऐसे मरीज की सूचना नहीं है और ना ही ऐसे कोई मरीज भर्ती किए गए हैं।