लेखक रमेश प्रसाद सिंह “पत्रकार ” राही तु मतवाले हैं,गजब खेल निराले हैं। बचपन में निश्छल भावों वाले है,कदम तेरी निराले हैं। राही तू मतवाले हैं,गजब खेल निराले हैं। नयनों के सुखसागर पली भाव जगाने वाले है,चली बसंती की राही मासूम के स्वर निराले हैं। भावों के स्वर में निश्छल भाव जगाने वाले हैं,शयन सांवरिया … Continue reading शीर्षक : राही तु मतवाले हैं।
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