
हाजीपुर/पातेपुर (वैशाली),27 जुलाई 2026 | सत्यम ग्राम न्यूज़।
वैशाली जिले के पातेपुर प्रखंड में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पीएम श्री आशो कुंवर उच्च माध्यमिक विद्यालय, भरथीपुर तथा राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, दोघरा से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) वैशाली के स्पष्ट आदेशों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
भरथीपुर विद्यालय : एक करोड़ के घोटाले के आरोपी निलंबित प्रभारी को अब भी नहीं हटाया गया प्रभार से
पीएम श्री आशो कुंवर उच्च माध्यमिक विद्यालय, भरथीपुर में लगभग एक करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता के आरोप में तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक मोहम्मद फैज स्कूल को विभाग द्वारा निलंबित किया गया था।
इसके बाद 18 जून 2026 को जिला शिक्षा पदाधिकारी, वैशाली ने पत्रांक-1260 जारी कर शिक्षक अर्जुन पंडित को विद्यालय का प्रभारी प्रधानाध्यापक नामित करते हुए शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रभार सौंपने का आदेश दिया।
लेकिन आदेश जारी होने के एक माह से अधिक समय बाद भी वर्तमान प्रभारी को विद्यालय का प्रभार नहीं सौंपा गया। शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत सहयोग पोर्टल पर दर्ज कराई, जिसके बाद DEO ने 22 जुलाई 2026 को पत्रांक-1570 जारी कर दो दिनों के भीतर सम्पूर्ण प्रभार हस्तांतरित करने का अंतिम निर्देश दिया। आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई कि अनुपालन नहीं होने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
BEO पातेपुर पर आदेशों की अवहेलना का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) पातेपुर की कथित मिलीभगत के कारण वर्तमान प्रभारी को आज तक चार्ज नहीं दिलाया गया।
सत्यम ग्राम न्यूज़ द्वारा जब इस संबंध में BEO पातेपुर से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उनका कथित जवाब था—
“आपको जो भी लिखना है लिखिए, हम वर्तमान प्रभारी को चार्ज नहीं देंगे।”
यदि यह कथन सही है, तो यह जिला शिक्षा पदाधिकारी के आदेशों की खुली अवहेलना और प्रशासनिक अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
दूसरा मामला : दोघरा विद्यालय में भी DEO के आदेश की अनदेखी
इसी प्रकार राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, दोघरा (पातेपुर) में भी प्रभार हस्तांतरण एवं वित्तीय अभिलेखों से संबंधित शिकायत सहयोग पोर्टल शिकायत संख्या-583755 पर दर्ज की गई थी।
इस मामले में DEO कार्यालय ने पत्रांक-1445 दिनांक 10.07.2026 के माध्यम से जांच का निर्देश दिया था। बावजूद इसके समय पर जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई और न ही वरिष्ठ शिक्षक को प्रभार दिलाया गया।
इसके बाद 22 जुलाई 2026 को पत्रांक-1567 जारी कर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने BEO पातेपुर को कड़ी फटकार लगाते हुए तीन दिनों के भीतर स्थल निरीक्षण कर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने तथा आदेश का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही चेतावनी दी गई कि आदेश की अवहेलना होने पर संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
उठ रहे हैं गंभीर सवाल
क्या जिला शिक्षा पदाधिकारी के आदेशों का पालन कराने में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी विफल रहे हैं?
क्या एक करोड़ रुपये के वित्तीय अनियमितता मामले में निलंबित प्रभारी को संरक्षण दिया जा रहा है?
दो-दो मामलों में सहयोग पोर्टल की शिकायतों और DEO के आदेशों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यदि जिला स्तर के आदेशों का भी पालन नहीं होगा, तो शिक्षा विभाग में जवाबदेही कैसे तय होगी?
शिक्षा विभाग के इन दोनों मामलों ने प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और आदेशों के अनुपालन को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला शिक्षा पदाधिकारी इन आदेशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या कदम उठाते हैं।
निष्कर्ष : वित्तीय अनियमितता से संबंधित आरोप विभागीय अभिलेखों और कार्रवाई पर आधारित हैं। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगा।
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Author: AKHILESH KUMAR
Editor in Chief